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by Divya Prakash Dubey
दो दोस्त, जो ढूँढ़ने चले हैं कि कविता आख़िर कहाँ से आती है। एक छोटे शहर की सुपर मॉम, जो रोज़ टीवी पर आने का सपना देखती है। भोपाल की वो लड़की, जो अब भी अपने मुंबई के पेन फ़्रेंड को हाथ से लिखी चिट्ठियाँ भेजती है। एक मॉडल, जिसका एक गाना हिट होने के बाद सब कुछ फ़्लॉप हो गया। देहरादून में रहने वाला डाकिया, जो शहर का सबसे अच्छा ऐक्टर है। लखनऊ की पुरानी हवेली में रहने वाले ज़िंदा लोग, जिनको लोगों ने भूत मानकर छोड़ दिया है। द्रौपदी, जिसने पाँच भाइयों में बँटने से मना कर दिया था। गौतम बुद्ध, जो अगर घर लौट गए होते तो क्या होता! दिव्य प्रकाश दुबे की ये 16 कहानियाँ, अलग-अलग शहरों में रहने वाले आम और ख़ास दोनों तरह के लोगों को नए शेड में दिखाने की कोशिश करती हैं। वे लोग, जो अपनी आधी-अधूरी हसरतों के साथ भी पूरे हैं।

by Dr. Sushma Gupta
गृहयुद्ध में तबाह सीरिया वहाँ की स्त्रियों के लिए भयावह यातनाघर बन गया। चोटिल देह और आत्मा लिए भारतीय मूल की एक सीरियाई लड़की भारत आती है। यहाँ उसकी मुलाक़ात भारतीय सेना के उस ऑफ़िसर से होती है, जो आतंकवाद से लड़ने में अपना बहुत-कुछ गँवा चुका है। जीवन के सियाह रंगों से भरे ये दो लोग एक लंबी यात्रा पर निकल पड़ते हैं। ‘क़ितराह’ यात्रा में घटित होता गल्प है। वह पहले लड़की और लड़के के जीवन में ‘घट’ चुका है, जो इन दोनों को इस क्रूर ‘घटे’ की गली के अंत तक छोड़ आया है। वहाँ से वापस अकेले लौटने का साहस उनके पास नहीं है। यह उपन्यास पाठकों को भी पात्रों के साथ यात्रा पर ले जाता है जिसे पढ़ते हुए वो अपने भीतर उन अनजाने, भुला दिए गए सपनों की ओर लौटने लगते हैं, लेखक की सुंदर भाषा और दृष्टि का आश्वासन ख़ुद के कंधों पर लिए। पर जब तक जीवन शेष है, घटित-अघटित सब कुछ लौटकर दस्तक देता ही है, बार-बार...

by Divya Prakash Dubey
हम सभी की जिंदगी में एक लिस्ट होती है। हमारे सपनों की लिस्ट, छोटी-मोटी खुशियों की लिस्ट। सुधा की जिंदगी में भी एक ऐसी ही लिस्ट थी। हम सभी अपनी सपनों की लिस्ट को पूरा करते-करते लाइफ गुज़ार देते हैं। जब सुधा अपनी लिस्ट पूरी करते हुए लाइफ़ की तरफ़ पहुँच रही थी तब तक चंदर 30 साल का होने तक वो सबकुछ कर चुका था जो कर लेना चाहिए था। तीन बार प्यार कर चुका था, एक बार वो सच्चा वाला, एक बार टाइम पास वाला और एक बार लिव-इन वाला। वो एक पर्फेक्ट लाइफ चाहता था। मुसाफिर Cafe कहानी है सुधा की, चंदर की, उन सारे लोगों की जो अपनी विश लिस्ट पूरी करते हुए perfect लाइफ खोजने के लिए भटक रहे हैं।

by मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand)
Munshi Premchand’s real name was Dhanpat Rai. He was born on 31 July 1880 in Lamhi village in Banaras. He was born into a middle class family which made him keenly observe the poverty and disadvantages of the middle class society. He dedicated his whole life to Hindi literature. He was honoured with the titles of a short-story writer, a novelist and a social reformer. He died on 8 October, 1936.In this collection of short stories, Premchand has thrown light on the different aspects of society such as social systems, faith and religion. The story ‘Kafan’ reflects the poverty-stricken upbringing of Premchand and depicts the struggles of the poor for survival.

by Kapil Mishra
पहली उड़ान एक ऐसा काव्य संग्रह है जो जीवन की विभिन्न अनुभूतियों—प्रेम, पीड़ा, बिछड़न, आशा, संघर्ष और आत्मचिंतन—को शब्दों में पिरोता है। इस संग्रह में संकलित कविताएं पाठक को भीतर तक झकझोरती हैं और उन्हें खुद से, अपने बीते पलों और आने वाले कल से जोड़ देती हैं। हर कविता एक अलग भावभूमि पर खड़ी है — कोई विरह की तपन को स्वर देती है, तो कोई प्रेम की नमी को। कहीं समाज की कठोर सच्चाई है, तो कहीं आत्मा की कोमल पुकार। यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो केवल पढ़ना नहीं, अनुभव करना चाहते हैं। जिनके लिए कविता केवल रचना नहीं, एक आत्मीय संवाद है।

by Poonam Singh

by Dr. Sushma Gupta
ये कहानियाँ हैं उन आम और ख़ास इंसानों की, जो प्रेम में जिए, प्रेम के भ्रम में जिए, जो फ़रेब में फ़ना हुए और ख़ुद भी फ़रेबी हुए। कहानियाँ उनकी जिन्होंने दुनिया के हाथों शिकस्त खाई और उनकी भी जिन्होंने डरकर हालात के आगे घुटने नहीं टेके। यह उन 11 कहानियों का संग्रह है जो ज़ेहन और दिल की कशमकश का हाल बयाँ करती हुई, अपने किरदारों को सफ़ेद और काले के पार ले गई हैं। कल्पना और यथार्थ के बीच रहस्य के पुल बाँधती, लेखक की भाषा और शैली इन कहानियों की विशिष्टता है।

by Maneesha Tomar
संख्याओं से सजी ज़िन्दगी केवल अंकों की बात नहीं करती, बल्कि उन अनदेखी कहानियों को उजागर करती है जो हर संख्या के पीछे छिपी होती हैं। यह पुस्तक जीवन के अनुभवों, भावनाओं और रिश्तों को संख्याओं के प्रतीकात्मक अर्थों के माध्यम से प्रस्तुत करती है। कभी अंक संघर्ष बन जाते हैं, कभी उपलब्धि की पहचान, तो कभी यादों का हिसाब। लेखिका मनीषा तोमर ने सरल, संवेदनशील और गहन लेखन शैली में यह दिखाने का प्रयास किया है कि हमारा जीवन कैसे हर कदम पर संख्याओं से जुड़ा होता है—जन्म से लेकर सपनों तक, हार से जीत तक। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखना चाहते हैं, जहाँ हर संख्या एक कहानी कहती है और हर कहानी हमें खुद से जोड़ती है। संख्याओं से सजी ज़िन्दगी आत्मचिंतन, प्रेरणा और जीवन के सूक्ष्म सत्य को समझने का एक सुंदर साहित्यिक प्रयास है।

by Divya Prakash Dubey
आप कह सकते हैं कि 'शर्तें लागू' नई वाली हिंदी की पहली किताब है। इस किताब में आपके स्कूल में पढ़ने वाली वह लड़की है जिसके बारे में सब बातें बनाते थे। मोहल्ले के वह भइया हैं जो कुछ भी हो जाता था तो कहते थे टेंशन मत लो यार सब सही हो जाएगा। वे अंकल हैं जो कभी आपसे ख़ुश नही होते। ऐसे समझ लीजिए जैसे किसी ने आपकी डायरी लिख दी हो जिसमें कुछ सच हैं, कुछ यादें हैं, पहला प्यार है और आपकी कुछ ऐसी बातें जो केवल आपको ही पता हैं। इस किताब में शामिल सभी 14 कहानियाँ आपके आसपास की ही कहानियाँ हैं।.

by Divya Prakash Dubey
Reading books is a kind of enjoyment. Reading books is a good habit. We bring you a different kinds of books. You can carry this book where ever you want. It is easy to carry. It can be an ideal gift to yourself and to your loved ones. Care instruction keep away from fire.

by Akash Singh Rathore 'मुसाफ़िर'
सरकारी मास्टर" सिर्फ एक शिक्षक की कहानी नहीं है, बल्कि भारत के उन हजारों गुमनाम गाँवों की दास्तां है जो नक्शे पर तो हैं, लेकिन विकास की नज़रों से ओझल हैं। कहानी का नायक, अगस्त्य, शहर की चकाचौंध में पला-बढ़ा एक महत्वकांक्षी युवा है, जिसके लिए सरकारी नौकरी सिर्फ एक 'सुरक्षा कवच' थी। लेकिन उसकी तकदीर उसे 'महुआ-डीह' ले आती है—एक ऐसा आदिवासी गाँव जहाँ बिजली और नेटवर्क से पहले भूख और अंधविश्वास पहुँचते हैं। यहाँ शिक्षा व्यवस्था कागज़ों पर 'फर्स्ट क्लास' है, लेकिन असलियत में स्कूल की छत छलनी है और मिड-डे मील का राशन प्रधान के गोदाम में कैद है। शुरुआत में अगस्त्य भागना चाहता है। उसे वहां की धूल, गरीबी और सन्नाटा काटता है। लेकिन एक 8 साल के बच्चे, बुधिया, का एक ताना—"पिछला मास्टर छत उखाड़ ले गया, तुम क्या ले जाओगे?"—उसके जमीर को झकझोर देता है। वह रुकने का फैसला करता है। यहाँ से शुरू होती है अगस्त्य की जंग। उसकी टक्कर किसी छोटे-मोटे गुंडे से नहीं, बल्कि प्रधान जोरावर सिंह से है, जो मानता है कि "गरीब पढ़-लिख गया तो सवाल पूछेगा, और अनपढ़ रहेगा तो जी-हुज़ूरी करेगा।" अगस्त्य को 'किडनी चोर' कहकर बदनाम किया जाता है, उसके स्कूल का राशन चोरी होता है, उसकी निजी ज़िंदगी (मंगेतर स्नेहा) छूट जाती है, और अंत में उसके स्कूल पर बुलडोजर (पीला पंजा) चलवा दिया जाता है। लेकिन अगस्त्य हर वार का जवाब लाठी से नहीं, बल्कि 'कलम' और 'दिमाग' से देता है। वह बच्चों को जोड़ता है, गाँव की औरतों को जगाता है और सिस्टम के भीतर छिपे अच्छे लोगों (जैसे सूबेदार रघुबीर और ईमानदार DEO) को साथ लाता है। यह कहानी एक डरपोक नौकरीपेशा लड़के के 'नायक' बनने का सफर है। अंत में, अगस्त्य स्कूल को तो बचा लेता है, लेकिन अपनी सबसे कीमती चीज़—अपना 'शहरी अहंकार'—वहीं छोड़ आता है और बदले में ले जाता है उन बच्चों का बेशकीमती प्यार।

by Nilesh Pathak
“भस्माङ् पर्व” — आयुध श्रृंखला का प्रथम अध्याय सागर मंथन और अमृत विभाजन से जन्मि एक काल्पनिक गाथा, जहाँ देव, दानव, मानव, नाग और चौदह भुवन—सभी समय की अदृश्य डोरियों से बंधे हैं । कलियुग की अंधकारमय छाया में प्रकट होता है सतयुग का एक अद्वितीय महारथी—महर्षि भस्माङ्ग । सात दुर्लभ सिद्धियों, अनगिनत दिव्य अस्त्रों और चंद्रहास परशु से सुसज्जित, उसका एकमात्र लक्ष्य है— कपाल महाकाल योग के माध्यम से पंच महाविकारों से प्रभावित लोगों को अनंतशून्य में विलीन कर कलियुग को पुनः सतयुग में स्थापित करना । पर समय तत्वों (भूत–भविष्य–वर्तमान) की शक्ति असीम है, और इन्हीं तत्वों को पाने के लिए आगे बढ़ रहा है तमस एक असुर वंशज, जो एक महादैत्य को वर्तमान में लाकर असुरों का स्वर्णिम साम्राज्य पुनः खड़ा करना चाहता है। अब निर्णायक संघर्ष अटल है— क्या शिवाय का दिव्य त्रिशूल और महर्षि सर्वग्य का मार्गदर्शन भस्माङ्ग के परशु और तमस की तामसिक शक्तियों को रोक पाएगा? क्या DSF (Defense Against Supernatural Forces) रुद्र ऊर्जाओं से प्रोजेक्ट बरबरिक को सफलतापूर्वक आरंभ कर सकेगा? यह केवल दो पक्षों का नहीं, बल्कि भूत, भविष्य और वर्तमान का युद्ध है। एक ऐसी महागाथा जहाँ हर अंत एक नया आरम्भ है जो एक और गहरे रहस्य का द्वार खोलती है। !! अंतः अस्ति प्रारंभः !!
Upcoming books that will be available soon.

by Surendra Kumar Nayak
Ek Aur Dharti Aba is a profound Hindi novel that delves into the complexities of human emotions, social struggles, and the indomitable will to survive. Written by the acclaimed author Surendra Kumar Nayak, this book is not just a story of unrequited love or personal loss; it is a powerful narrative about rising from the ashes of failure and embracing life with renewed vigor. Set against a backdrop that echoes the revolutionary spirit of "Dharti Aba" (Birsa Munda), the novel explores the life of characters like 'Aranya Maa,' who embody the strength of nature and the determination of the human soul. Through their eyes, the author masterfully weaves a story of ত্যাগ (Sacrifice), समर्पण (Dedication), and decisions that define a lifetime. Why You Should Read This Book: Rich Cultural Narrative: Offers a deep dive into the lives, struggles, and values of indigenous communities and their connection to the land. Philosophical Depth: Moving beyond a simple romance, it addresses the existential conflicts and the joy of a simple, purposeful life. Masterful Storytelling: Surendra Kumar Nayak, a seasoned writer with numerous awards, brings his vast experience to create a realistic and emotionally resonant world. Inspirational: A perfect read for those looking for a story that celebrates the triumph of the human spirit over adversity. About the Author: Surendra Kumar Nayak is a distinguished litterateur with a prolific career spanning decades. A former bank manager turned dedicated researcher and writer, his works have been recognized by prestigious institutions. His deep understanding of tribal folklore and contemporary social issues makes Ek Aur Dharti Aba a landmark in modern Hindi literature.

by Nilesh Pathak
Bhasmaang Parv : Book One of the Ayudh Series Born in the aftermath of the cosmic churning and the division of immortality, a new legend awakens in the shadow of the Kaliyuga From the echoes of Satya Yuga emerges Maharishi Bhasmaang armed with his divine Parashu, seven celestial siddhis, and an arsenal beyond imagination. His purpose is absolute: through the sacred Kapal Mahakaalyog, he seeks to dissolve the five primal vices desire, anger, ego, attachment, and greed into nothingness, and restore the world to its lost purity. But time itself resists. The universe does not bend so easily, The forces of past, present, and future are no longer neutral. Tamasa : The heir of the Asura lineage rises with a dark ambition to resurrect the ancient demon Nigasa and reclaim a forgotten golden age of chaos and dominion. As divine powers collide with demonic intent, a greater question looms Will the sacred Trishul of Shivay stand against Bhasmaang’s might and Tamasa’s darkness? Can the DSF (Defense Against Supernatural Forces), alongside the enigmatic Mahaguru Maharishi Sarvagya of Mrityunjaya Math, awaken the forbidden Project Barbarik? And if they do, what price must humanity pay? This is not just a battle of gods and demons. It is a war for the soul of existence itself. Where time fracture. Where destinies collide. And where every ending births a new beginning. Welcome To Ayudh Mythoverse.

by Hari Ram Kahar
Soone Soone Khet" is a deeply moving novel that beautifully captures the essence of rural India, the bitterness of evolving relationships, and the shifting social landscape. In this narrative, Hariram Kahar paints a vivid picture of a village where the line between belonging and selfishness begins to blur. Key Highlights: A realistic portrayal of rural life, family conflicts, and an emotional storyline. Genre: Fiction / Rural Literature About the Author Hariram Kahar was born on July 1, 1956, in Pipariya, Madhya Pradesh. After completing his B.Sc. and M.A. in Hindi, he dedicated many years to a career in teaching. His passion for literature dates back to his childhood, and his works have been featured in prestigious magazines such as Hans, Nandan, and Grah Lakshmi. Beyond "Soone Soone Khet," his notable works include "Cheel ka Khazana" and "Heere ki Talash." He has been honored with numerous awards for his significant contributions to literature.

by Dr Vivek Dwivedi
"देश, दुनिया और समाज को कोई क्या दे रहा है! अच्छा या बुरा जो भी, असल में वही उसका चरित्र है।" क्या इंसान का चरित्र सिर्फ सफेद या काला होता है? या इसके बीच में छुपी होती है एक ऐसी धूसर (grey) स्थिति, जहां मजबूरी और स्वार्थ आपस में टकराते हैं? 'चरितम' सुप्रसिद्ध लेखक डॉ. विवेक द्विवेदी का एक ऐसा सम्मोहक और झकझोर देने वाला हिंदी उपन्यास है, जो मानव मन की सबसे गहरी परतों को उघाड़ता है। यह कहानी है समाज के उस ताने-बाने की, जहां अच्छाई की ओट में बुराई छिपी है। इस उपन्यास में क्या खास है? मानव संवेदनाओं का ताना-बाना: यह उपन्यास दिखाता है कि कैसे एक इंसान अपने फायदे के लिए इंसानियत, धर्म और कर्म तक को दांव पर लगा देता है। रूढ़िवादी सोच पर प्रहार: यह कहानी जाति, धर्म और समाज के खोखले बंधनों से ऊपर उठकर 'प्रेम' की एक नई परिभाषा गढ़ती है। नफ़रत और समर्पण का द्वंद्व: जहां एक तरफ समाज की कड़वाहट और नफ़रत है, वहीं दूसरी तरफ त्याग, गहरा समर्पण और खुद को साबित करने का संघर्ष है। सच्चाई का आईना: क्या मैदान छोड़कर भाग जाना सिर्फ कायरता है या कभी-कभी यह एक इंसान की सबसे बड़ी मजबूरी होती है? राघव, बेनजीर, दंगा और सामाजिक उथल-पुथल के इर्द-गिर्द बुनी यह कहानी आपके दिल को छू जाएगी। यदि आप गंभीर, वैचारिक और समाज को एक नए नजरिए से दिखाने वाले बेहतरीन हिंदी उपन्यासों (Hindi Literature & Novels) को पढ़ने के शौकीन हैं, तो 'चरितम' आपकी बुकशेल्फ़ में जरूर होनी चाहिए।

by Meenakshi Ahuja
About The Book जीवन बदलती ऋतुओं का दर्पण है, जहाँ प्रत्येक क्षण अपनी विशिष्ट छवि और रंगों में निखरता है l कभी बसंत की मुस्कान से खिला हुआ , तों कभी शरद की शीतल पवन के झोंको में बिखरा हुआ l कभी ग्रीष्म की तपन में झुलझता हुआ, तों कभी पतझड़ की निरवता में अधूरेपन का अनुभव करता हुआ l फिर होता है वर्षा ऋतू का आगमन -अपने निर्मल जल से हर भ्रम को उलझा कर , हर निश्चितता को अपने वेग में बहा ले जाती है l इन बदलते रंगों और ज्वार भाटों के मध्य , जीवन अपनी शाश्वत धारा में स्थिर और अटल बना रहता है l हमारे निर्णय जीवन के दिशासूचक होते है -या तों मार्गदर्शक बनकर हमें सही दिशा दिखाते है , या फिर हमें पथभ्रष्ट कर विनाश का कारण बनते है , वही करुणा , विनम्रता , संयम और प्रेम से प्रेरित निर्णय हमें धर्म के आलोकित पथ पर अग्रसर करते है , जिससे हम अपने जीवन और जगत को प्रकाश से आलोकित करते है l कुछ लोग मुरझाए हुए वृक्ष की भांति अपने भाग्य को असफल मान लेते है , तों कुछ बसंत की प्रतीक्षा में अपनी आशाओं को जीवित रखते है l जीवन वास्तव में एक सतत संघर्ष है -चेतना और विस्मृति , अच्छाई और बुराई के मध्य l भले ही अच्छाई निराशा की छाया में डगमगाए, परंतु अंततः विजय सदैव अच्छाई की होती है l इस संघर्ष की तपीश में , ह्रदय के स्वपनो को उद्देश्य की वेदी पर बलिदान देना ही पड़ता है l देवेश की यात्रा , राधे से देवेश तक , प्रेम , वियोग और आत्मिक संघर्षो की ह्रदयविदारक पीड़ा से होकर गुजरती है l क्या मंजीरा की निर्दयता शेष और देवेश के माता -पिता का जीवन छीन लेगी , जो स्वार्थ और बलिदान के निरंतर संघर्ष में पिस रहे है ? क्या राधे , अपनी श्री- अपनी आत्मा के शाश्वत प्रेम -को त्यागकर देवेश के रूप में अपने भाग्य को स्वीकार करेगा ? क्या बुराई के अंधकार से संघर्ष करता देवेश अपनी मंजिल पा पायेगा ? क्या अपने जीवन के बसंत को पीछे छोड़ चुका राधे , पुन: अपने बसंत को आलिंगन कर पायेगा l धर्म की शाश्वत गाथाओं में निहित यह कथा प्रेम , त्याग और अच्छाई की बुराई पर विजय का उत्सव है l यह समर्पण और संघर्ष की गहरी और मार्मिक गाथा है , जो पाठकों के ह्रदय में गूँजती रहेगी l संघर्ष - प्रश्न और उतर बनकर हमारे ह्रदय में गहराई तक समाहित रहते है , फिर क्यों इस सत्य से हम विमुख होते हैं समझ कर भी क्यों अनभिज्ञ बने रहते है ? उतर जो हमारे अंतर्मन में जाग्रत है, क्यों मौन के बंधन में सिमटा रहता है?

by Meenakshi Ahuja
About The Book रसधारा - सप्त भावों का सुर जब सृष्टि की पहली धड़कन गूंजी, तब प्रकृति ने विरह की स्याही से प्रेम की पहली कविता रची। बादलों की गूंज, पवन की अंगड़ाई और वर्षा की पहली बूँदों से जन्मा भावों का वह दिव्य संगीत ही 'रसधारा' है - जहाँ हर कविता एक भाव है और हर भाव एक राग। यह केवल कविताओं का संग्रह नहीं, आत्मा की तरंगों में बहता एक मधुर प्रवाह है - जहाँ सात रस, सात राग और सात स्वरूप प्रकृति, प्रेम, भक्ति, करुणा, देशभक्ति, आत्मबोध और स्वप्निल संवेदनाएँ - सब मिलकर एक अनहद सुर बन गूंज उठते हैं। यहाँ शब्द नहीं, सुर बोलते हैं प्रेम नयनों की मुस्कान बनता है, राष्ट्र माँ की वाणी बनकर गूंजती है, ईश्वर अंतर्मन का स्वर बनकर धड़कता है, और मौन भी अपनी गाया कह जाता है। 'रसधारा' वह अनहद सुर है जहाँ भाव, राग और आत्मा मिलकर जीवन की सम्पूर्णता का संगीत रचते हैं- सात रसों की वह अमर ध्वनि, जो हर हृदय में गूंज उठेगी।

by Dev Soni
ख्यालों की दुनिया

by Pardeep kumar
प्रेम एक शाश्वत अनुभूति है, एक ऐसा भाव जो सृष्टि के कण-कण में व्याप्त है और मानवीय संवेदनाओं का सबसे मधुर, सबसे गहन पहलू भी। यह हृदय की वो रागिनी है जो कभी हौले से गुनगुनाती है, तो कभी भावनाओं के सागर में ज्वार बन उठती है। "हृदय रागिनी" इसी अनुभूति के विभिन्न सुरों को शब्दों में पिरोने का एक विनम्र प्रयास है। इस संग्रह की 100 कविताएँ प्रेम के उस सफर पर ले जाती हैं जहाँ पहला आकर्षण, अनुराग का अंकुरण, प्रीति का गहरा सागर, विरह की वेदना, मिलन की आस, प्रेम का स्थायी बसेरा और अंततः प्रेम के दर्शन और उसकी शाश्वतता के विभिन्न पड़ाव आते हैं। प्रत्येक कविता हृदय के किसी कोने से निकली एक रागिनी है – जो कभी मीठी, कभी दर्द भरी, कभी उम्मीद से रोशन, तो कभी समर्पण में डूबी हुई है। इस संग्रह का उद्देश्य प्रेम के बहुरंगी स्वरूप को उसकी संपूर्णता में चित्रित करना है, चाहे वह नव-अनुराग की चंचलता हो या परिपक्व प्रेम का ठहराव, विरह की टीस हो या मिलन का उल्लास। यहाँ कुछ कविताएँ पारंपरिक छंदों में हैं तो कुछ मुक्त छंद की स्वच्छंदता लिए हुए, ताकि भावों को उनकी स्वाभाविक लय मिल सके। यह संग्रह उन सभी पाठकों के लिए है जिन्होंने कभी प्रेम को महसूस किया है, उसकी राह देखी है, या उसकी गहराई में डूबना चाहा है। आशा है कि ये कविताएँ आपके हृदय के तारों को झंकृत करेंगी और आपको अपने प्रेम की अनुभूतियों से कहीं न कहीं जोड़ पाएंगी, आपको अपने मन की रागिनी सुना पाएंगी। प्रेम की इस अनंत यात्रा में, "हृदय रागिनी" आपका स्वागत करती है।