
@shiv-shankar-jha
Shiv Shankar Jha is a Central Government Officer by profession and a writer by passion. Deeply fond of art, literature, and music, he expresses his creative sensibilities through powerful and evocative writing. His first work, Haminasto, a collection of poetry and prose, introduced readers to his thoughtful and expressive voice. Brahma-Patra marks his debut Hindi novel, reflecting his ability to weave emotion, philosophy, and storytelling into a compelling narrative. Through his literary journey, Shiv Shankar Jha humbly seeks the love, blessings, and connection of his readers, hoping his words resonate deeply and leave a meaningful impact.
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2 books published

The writer is on a search spree: a search for his true identity. His identity as a devotee, as a lover, as a loyal son of the land and as a poet. The poet, through his words, has tried to turn all the stones of human personality upside down. The author believes that peace can be found outside only if there is peace within. Harmony within us is a thing to celebrate. Posing questions to oneself, cheering oneself and being unsatisfied with oneself are all inseparable human traits. Each feeling should be cherished with the thought that nothing is eternal in this world. There is no perfect end or beginning to anything. Beauty lies in this fleeting moment, and these handful of poems are an honest attempt to share this realisation with the world.

क्या हर आवाज़, जो भीतर सुनाई देती है, हमारी ही होती है? और क्या हर स्मृति, सच होती है या मृगतृष्णा? ब्रह्म-पत्र एक ऐसी कथा है जहाँ लिखना धीरे-धीरे आदत नहीं, आवश्यकता बन जाता है। शब्द बार-बार लौटते हैं, प्रश्न गहरे होते जाते हैं, और वास्तविकता अपनी सीमाएँ खोने लगती है। यहाँ प्रेम कोई घटना नहीं बल्कि एक मानसिक अवस्था है, जो समय, दूरी और तर्क से परे फैलती जाती है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, पाठक यह तय नहीं कर पाता कि वह किसी कहानी को पढ़ रहा है या किसी मन के भीतर झाँक रहा है। कुछ रिश्ते स्मृति में बनते हैं, कुछ मौन में टिके रहते हैं और कुछ केवल इसलिए जीवित रहते हैं क्योंकि उन्हें छोड़ा नहीं जा सकता। ब्रह्म-पत्र उन पाठकों के लिए है जो जानते हैं कि सबसे खतरनाक यात्राएँ अपने अंदर की ओर होती हैं। इस कहानी को न पहले कभी लिखा गया है और न ही कभी लिखा जा सकेगा - "न भूतो न भविष्यति"
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वक़्त मिले तो आप भी पढ़ियेगा 💕
प्रकृति के छटवे तत्व के रूप में प्रेम को बताया गया है
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हाथ थाम लो ना 🌻❤️ ______ किताब : ब्रह्म पत्र लेखक : @author_shankar
कलम जब उठती है, तो जज़्बात बोलते हैं, बंद दरवाजों के कई राज़ खोलते हैं। तारीफ आपकी है, जो इन लफ्जों को समझा, वरना लोग तो बस कागजों को तौलते हैं।"
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ब्रह्म पत्र
पांच कठिन वाक्य
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किताब की सबसे सुंदर पंक्तियां 🙌❤️
वकाई बहुत सुंदर एक एक शब्द सीधा दिल को छू जाए 💖🌸
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इस किताब की कहानी में हम ऐसे खो जाते हैं बाहर निकलना लगभग मुश्किल हो जाता है ।
इस कहानी के किरदार धार्मिक ,मीनाक्षी और एक अनजाना किरदार ..... वह कौन है यह आपको किताब पढ़ कर ही पता चलेगा । तो जरूर किताब खरीदें और पढ़ें कहानी बहुत अच्छी है।👍❤️❤️❤️🌹
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इस दिव्य कहानी में आपका फिर से स्वागत है।❤️🙏🏻
अब हम कहानी के एकदम बीचोबीच पहुँच चुके हैं। हो सकता है कि अब आपके क़दम डगमगाने लगें और आपके मन में पीछे हटने के विचार आने लगें। लेकिन इस कहानी में ऐसा मुमकिन नहीं है। इस कहानी में दरवाजे के उस तरफ़ आपका अतीत है और इस तरफ़ भविष्य। इस कहानी में कोई वर्तमान नहीं है। **कहानी का किरदार आज फिर लौट रहा है उसी अनदेखे ठिकाने, जहाँ से उसे वो पहला बुलावा आया था, जैसे किसी अज्ञात शक्ति ने उसकी रूह को नाम लेकर आवाज़ दी हो। रास्ते में हवा अचानक धीमी पड़ जाती है, पेड़ अपनी शाखों में कुछ छुपा लेते हैं, और धरती उसके कदमों का वजन पहचानने लगती है… सब कुछ थोड़ा अजीब, थोड़ा अनकहा, थोड़ा डर-सा। पर उसे अपने प्रेम पर यक़ीन है, वही प्रेम जो दूरतम अँधेरों में भी अपनी लौ नहीं खोता, वही प्रेम जो राहों को नहीं, राहें खुद प्रेम को चुन लेती हैं। वह आगे बढ़ रहा है… क्योंकि कभी-कभी बुलावे से ज़्यादा गहरा, उस तक पहुँचने का साहस होता है तो आइए देखते हैं आगे क्या होगा!**
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आइए, मैं आपको एक दिव्य यात्रा पर ले चलता हूँ। मेरे साथ चलने की दो शर्तें हैं- पहला कि आपके दिल में असीम प्रेम हो और दूसरा कि आपके मन में अटूट विश्वास।
‘ब्रह्म-पत्र : न भूतो न भविष्यति’ अब बस दहलीज़ पर है; वही प्रेम, जो नदी की तरह शांत भी है और नियति की तरह अटल भी। वही रहस्य, जो महीनों से मेरी सांसों में धड़क रहा था, आज आपकी ओर पहला दरवाज़ा खोल रहा है। ये सिर्फ़ एक कहानी नहीं, ये एक पुकार है, समय के उस पार से, जहाँ अधूरे पत्र अब भी किसी के इंतेज़ार में हैं! तैयार रहिए… क्योंकि जो आने वाला है, वह प्रेम की आबरू भी है और विरह की अंतिम आग भी। ** मुझे पता है कि इस किताब को बहुत सारा प्रेम मिलेगा। ये किताब मेरे व्यक्तित्व को और मेरी सोच को काफ़ी हद तक बयान करेगी। असम की दिव्य धरती से शुरू होती ये कहानी आपको काशी तक ले जाएगी। शायद ऐसी कहानी कभी लिखी नहीं गई है और ना ही कभी लिखी जाएगी; ना भूतो ना भविष्यति!
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मेरी किताब: ब्रह्म-पत्र
ये कहानी अलग है क्या? आप इतना सस्पेंस क्यों create कर रहे हैं? क्या है ऐसा इस कहानी में? हर रोज़ मुझसे ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं। मेरा एक ही जवाब है- ‘न भूतो न भविष्यति’! ऐसी कहानी ना कभी लिखी गई है और ना कभी लिखी जाएगी। मैं ख़ुद भी चाहूँ तो दोबारा ऐसा नहीं लिख सकता। कहानी को पढ़िए और मेरे इस सफ़र में मेरे साथ चलिए। ❤️❤️
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