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by Divya Prakash Dubey
दो दोस्त, जो ढूँढ़ने चले हैं कि कविता आख़िर कहाँ से आती है। एक छोटे शहर की सुपर मॉम, जो रोज़ टीवी पर आने का सपना देखती है। भोपाल की वो लड़की, जो अब भी अपने मुंबई के पेन फ़्रेंड को हाथ से लिखी चिट्ठियाँ भेजती है। एक मॉडल, जिसका एक गाना हिट होने के बाद सब कुछ फ़्लॉप हो गया। देहरादून में रहने वाला डाकिया, जो शहर का सबसे अच्छा ऐक्टर है। लखनऊ की पुरानी हवेली में रहने वाले ज़िंदा लोग, जिनको लोगों ने भूत मानकर छोड़ दिया है। द्रौपदी, जिसने पाँच भाइयों में बँटने से मना कर दिया था। गौतम बुद्ध, जो अगर घर लौट गए होते तो क्या होता! दिव्य प्रकाश दुबे की ये 16 कहानियाँ, अलग-अलग शहरों में रहने वाले आम और ख़ास दोनों तरह के लोगों को नए शेड में दिखाने की कोशिश करती हैं। वे लोग, जो अपनी आधी-अधूरी हसरतों के साथ भी पूरे हैं।

by Dr. Sushma Gupta
गृहयुद्ध में तबाह सीरिया वहाँ की स्त्रियों के लिए भयावह यातनाघर बन गया। चोटिल देह और आत्मा लिए भारतीय मूल की एक सीरियाई लड़की भारत आती है। यहाँ उसकी मुलाक़ात भारतीय सेना के उस ऑफ़िसर से होती है, जो आतंकवाद से लड़ने में अपना बहुत-कुछ गँवा चुका है। जीवन के सियाह रंगों से भरे ये दो लोग एक लंबी यात्रा पर निकल पड़ते हैं। ‘क़ितराह’ यात्रा में घटित होता गल्प है। वह पहले लड़की और लड़के के जीवन में ‘घट’ चुका है, जो इन दोनों को इस क्रूर ‘घटे’ की गली के अंत तक छोड़ आया है। वहाँ से वापस अकेले लौटने का साहस उनके पास नहीं है। यह उपन्यास पाठकों को भी पात्रों के साथ यात्रा पर ले जाता है जिसे पढ़ते हुए वो अपने भीतर उन अनजाने, भुला दिए गए सपनों की ओर लौटने लगते हैं, लेखक की सुंदर भाषा और दृष्टि का आश्वासन ख़ुद के कंधों पर लिए। पर जब तक जीवन शेष है, घटित-अघटित सब कुछ लौटकर दस्तक देता ही है, बार-बार...

by Divya Prakash Dubey
हम सभी की जिंदगी में एक लिस्ट होती है। हमारे सपनों की लिस्ट, छोटी-मोटी खुशियों की लिस्ट। सुधा की जिंदगी में भी एक ऐसी ही लिस्ट थी। हम सभी अपनी सपनों की लिस्ट को पूरा करते-करते लाइफ गुज़ार देते हैं। जब सुधा अपनी लिस्ट पूरी करते हुए लाइफ़ की तरफ़ पहुँच रही थी तब तक चंदर 30 साल का होने तक वो सबकुछ कर चुका था जो कर लेना चाहिए था। तीन बार प्यार कर चुका था, एक बार वो सच्चा वाला, एक बार टाइम पास वाला और एक बार लिव-इन वाला। वो एक पर्फेक्ट लाइफ चाहता था। मुसाफिर Cafe कहानी है सुधा की, चंदर की, उन सारे लोगों की जो अपनी विश लिस्ट पूरी करते हुए perfect लाइफ खोजने के लिए भटक रहे हैं।

by मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand)
Munshi Premchand’s real name was Dhanpat Rai. He was born on 31 July 1880 in Lamhi village in Banaras. He was born into a middle class family which made him keenly observe the poverty and disadvantages of the middle class society. He dedicated his whole life to Hindi literature. He was honoured with the titles of a short-story writer, a novelist and a social reformer. He died on 8 October, 1936.In this collection of short stories, Premchand has thrown light on the different aspects of society such as social systems, faith and religion. The story ‘Kafan’ reflects the poverty-stricken upbringing of Premchand and depicts the struggles of the poor for survival.

by Kapil Mishra
पहली उड़ान एक ऐसा काव्य संग्रह है जो जीवन की विभिन्न अनुभूतियों—प्रेम, पीड़ा, बिछड़न, आशा, संघर्ष और आत्मचिंतन—को शब्दों में पिरोता है। इस संग्रह में संकलित कविताएं पाठक को भीतर तक झकझोरती हैं और उन्हें खुद से, अपने बीते पलों और आने वाले कल से जोड़ देती हैं। हर कविता एक अलग भावभूमि पर खड़ी है — कोई विरह की तपन को स्वर देती है, तो कोई प्रेम की नमी को। कहीं समाज की कठोर सच्चाई है, तो कहीं आत्मा की कोमल पुकार। यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो केवल पढ़ना नहीं, अनुभव करना चाहते हैं। जिनके लिए कविता केवल रचना नहीं, एक आत्मीय संवाद है।

by Poonam Singh

by Dr. Sushma Gupta
ये कहानियाँ हैं उन आम और ख़ास इंसानों की, जो प्रेम में जिए, प्रेम के भ्रम में जिए, जो फ़रेब में फ़ना हुए और ख़ुद भी फ़रेबी हुए। कहानियाँ उनकी जिन्होंने दुनिया के हाथों शिकस्त खाई और उनकी भी जिन्होंने डरकर हालात के आगे घुटने नहीं टेके। यह उन 11 कहानियों का संग्रह है जो ज़ेहन और दिल की कशमकश का हाल बयाँ करती हुई, अपने किरदारों को सफ़ेद और काले के पार ले गई हैं। कल्पना और यथार्थ के बीच रहस्य के पुल बाँधती, लेखक की भाषा और शैली इन कहानियों की विशिष्टता है।

by Maneesha Tomar
संख्याओं से सजी ज़िन्दगी केवल अंकों की बात नहीं करती, बल्कि उन अनदेखी कहानियों को उजागर करती है जो हर संख्या के पीछे छिपी होती हैं। यह पुस्तक जीवन के अनुभवों, भावनाओं और रिश्तों को संख्याओं के प्रतीकात्मक अर्थों के माध्यम से प्रस्तुत करती है। कभी अंक संघर्ष बन जाते हैं, कभी उपलब्धि की पहचान, तो कभी यादों का हिसाब। लेखिका मनीषा तोमर ने सरल, संवेदनशील और गहन लेखन शैली में यह दिखाने का प्रयास किया है कि हमारा जीवन कैसे हर कदम पर संख्याओं से जुड़ा होता है—जन्म से लेकर सपनों तक, हार से जीत तक। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखना चाहते हैं, जहाँ हर संख्या एक कहानी कहती है और हर कहानी हमें खुद से जोड़ती है। संख्याओं से सजी ज़िन्दगी आत्मचिंतन, प्रेरणा और जीवन के सूक्ष्म सत्य को समझने का एक सुंदर साहित्यिक प्रयास है।

by Divya Prakash Dubey
आप कह सकते हैं कि 'शर्तें लागू' नई वाली हिंदी की पहली किताब है। इस किताब में आपके स्कूल में पढ़ने वाली वह लड़की है जिसके बारे में सब बातें बनाते थे। मोहल्ले के वह भइया हैं जो कुछ भी हो जाता था तो कहते थे टेंशन मत लो यार सब सही हो जाएगा। वे अंकल हैं जो कभी आपसे ख़ुश नही होते। ऐसे समझ लीजिए जैसे किसी ने आपकी डायरी लिख दी हो जिसमें कुछ सच हैं, कुछ यादें हैं, पहला प्यार है और आपकी कुछ ऐसी बातें जो केवल आपको ही पता हैं। इस किताब में शामिल सभी 14 कहानियाँ आपके आसपास की ही कहानियाँ हैं।.

by Divya Prakash Dubey
Reading books is a kind of enjoyment. Reading books is a good habit. We bring you a different kinds of books. You can carry this book where ever you want. It is easy to carry. It can be an ideal gift to yourself and to your loved ones. Care instruction keep away from fire.

by Akash Singh Rathore 'मुसाफ़िर'
सरकारी मास्टर" सिर्फ एक शिक्षक की कहानी नहीं है, बल्कि भारत के उन हजारों गुमनाम गाँवों की दास्तां है जो नक्शे पर तो हैं, लेकिन विकास की नज़रों से ओझल हैं। कहानी का नायक, अगस्त्य, शहर की चकाचौंध में पला-बढ़ा एक महत्वकांक्षी युवा है, जिसके लिए सरकारी नौकरी सिर्फ एक 'सुरक्षा कवच' थी। लेकिन उसकी तकदीर उसे 'महुआ-डीह' ले आती है—एक ऐसा आदिवासी गाँव जहाँ बिजली और नेटवर्क से पहले भूख और अंधविश्वास पहुँचते हैं। यहाँ शिक्षा व्यवस्था कागज़ों पर 'फर्स्ट क्लास' है, लेकिन असलियत में स्कूल की छत छलनी है और मिड-डे मील का राशन प्रधान के गोदाम में कैद है। शुरुआत में अगस्त्य भागना चाहता है। उसे वहां की धूल, गरीबी और सन्नाटा काटता है। लेकिन एक 8 साल के बच्चे, बुधिया, का एक ताना—"पिछला मास्टर छत उखाड़ ले गया, तुम क्या ले जाओगे?"—उसके जमीर को झकझोर देता है। वह रुकने का फैसला करता है। यहाँ से शुरू होती है अगस्त्य की जंग। उसकी टक्कर किसी छोटे-मोटे गुंडे से नहीं, बल्कि प्रधान जोरावर सिंह से है, जो मानता है कि "गरीब पढ़-लिख गया तो सवाल पूछेगा, और अनपढ़ रहेगा तो जी-हुज़ूरी करेगा।" अगस्त्य को 'किडनी चोर' कहकर बदनाम किया जाता है, उसके स्कूल का राशन चोरी होता है, उसकी निजी ज़िंदगी (मंगेतर स्नेहा) छूट जाती है, और अंत में उसके स्कूल पर बुलडोजर (पीला पंजा) चलवा दिया जाता है। लेकिन अगस्त्य हर वार का जवाब लाठी से नहीं, बल्कि 'कलम' और 'दिमाग' से देता है। वह बच्चों को जोड़ता है, गाँव की औरतों को जगाता है और सिस्टम के भीतर छिपे अच्छे लोगों (जैसे सूबेदार रघुबीर और ईमानदार DEO) को साथ लाता है। यह कहानी एक डरपोक नौकरीपेशा लड़के के 'नायक' बनने का सफर है। अंत में, अगस्त्य स्कूल को तो बचा लेता है, लेकिन अपनी सबसे कीमती चीज़—अपना 'शहरी अहंकार'—वहीं छोड़ आता है और बदले में ले जाता है उन बच्चों का बेशकीमती प्यार।

by Nilesh Pathak
“भस्माङ् पर्व” — आयुध श्रृंखला का प्रथम अध्याय सागर मंथन और अमृत विभाजन से जन्मि एक काल्पनिक गाथा, जहाँ देव, दानव, मानव, नाग और चौदह भुवन—सभी समय की अदृश्य डोरियों से बंधे हैं । कलियुग की अंधकारमय छाया में प्रकट होता है सतयुग का एक अद्वितीय महारथी—महर्षि भस्माङ्ग । सात दुर्लभ सिद्धियों, अनगिनत दिव्य अस्त्रों और चंद्रहास परशु से सुसज्जित, उसका एकमात्र लक्ष्य है— कपाल महाकाल योग के माध्यम से पंच महाविकारों से प्रभावित लोगों को अनंतशून्य में विलीन कर कलियुग को पुनः सतयुग में स्थापित करना । पर समय तत्वों (भूत–भविष्य–वर्तमान) की शक्ति असीम है, और इन्हीं तत्वों को पाने के लिए आगे बढ़ रहा है तमस एक असुर वंशज, जो एक महादैत्य को वर्तमान में लाकर असुरों का स्वर्णिम साम्राज्य पुनः खड़ा करना चाहता है। अब निर्णायक संघर्ष अटल है— क्या शिवाय का दिव्य त्रिशूल और महर्षि सर्वग्य का मार्गदर्शन भस्माङ्ग के परशु और तमस की तामसिक शक्तियों को रोक पाएगा? क्या DSF (Defense Against Supernatural Forces) रुद्र ऊर्जाओं से प्रोजेक्ट बरबरिक को सफलतापूर्वक आरंभ कर सकेगा? यह केवल दो पक्षों का नहीं, बल्कि भूत, भविष्य और वर्तमान का युद्ध है। एक ऐसी महागाथा जहाँ हर अंत एक नया आरम्भ है जो एक और गहरे रहस्य का द्वार खोलती है। !! अंतः अस्ति प्रारंभः !!