
by Maneesha Tomar
संख्याओं से सजी ज़िन्दगी केवल अंकों की बात नहीं करती, बल्कि उन अनदेखी कहानियों को उजागर करती है जो हर संख्या के पीछे छिपी होती हैं। यह पुस्तक जीवन के अनुभवों, भावनाओं और रिश्तों को संख्याओं के प्रतीकात्मक अर्थों के माध्यम से प्रस्तुत करती है। कभी अंक संघर्ष बन जाते हैं, कभी उपलब्धि की पहचान, तो कभी यादों का हिसाब। लेखिका मनीषा तोमर ने सरल, संवेदनशील और गहन लेखन शैली में यह दिखाने का प्रयास किया है कि हमारा जीवन कैसे हर कदम पर संख्याओं से जुड़ा होता है—जन्म से लेकर सपनों तक, हार से जीत तक। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखना चाहते हैं, जहाँ हर संख्या एक कहानी कहती है और हर कहानी हमें खुद से जोड़ती है। संख्याओं से सजी ज़िन्दगी आत्मचिंतन, प्रेरणा और जीवन के सूक्ष्म सत्य को समझने का एक सुंदर साहित्यिक प्रयास है।
Publisher
Gyaneshwari Prakashan
ISBN
978-9347824203

maneeshatomar05@gmail.com
मनीषा तोमर का जन्म 5 दिसंबर 2002 को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में हुआ। उनके पिताजी का नाम वृन्दावन सिंह तोमर तथा माताजी का नाम सीता देवी है। वे मूल रूप से मुरैना जिले के तरसमा गाँव की निवासी हैं। मनीषा ने अपनी प्रारम्भिक से लेकर उच्च शिक्षा तक की पढ़ाई मुरैना जिले के पोरसा कस्बे से पूरी की है। वर्तमान में वे एम.एससी. (गणित) की छात्रा हैं और गणित विषय में विशेष रुचि रखती हैं। शैक्षणिक शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने महाराष्ट्र की यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी से Tally, Excel और MSCIT जैसे कंप्यूटर कोर्स भी किए हैं, जिससे उनकी तकनीकी और व्यावहारिक ज्ञान में भी अच्छी पकड़ बनी है। गणित के प्रति गहरी रुचि के साथ-साथ मनीषा को लेखन का भी विशेष शौक है। वे मानती हैं कि जीवन और गणित दोनों ही हमें तर्क, धैर्य और सही दिशा में सोचने की प्रेरणा देते हैं। इसी प्रेरणा से उनकी पहली पुस्तक “संख्याओं से सजी ज़िंदगी” प्रकाशित हुई, जिसमें जीवन के अनुभवों और गणित के विचारों को सरल और प्रेरणादायक शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। मनीषा तोमर का उद्देश्य शिक्षा, गणित और लेखन के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करना तथा समाज में सकारात्मक सोच और ज्ञान का प्रसार करना है। भविष्य में वे गणित के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के साथ-साथ लेखन के माध्यम से समाज में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाना चाहती हैं।