Loading...
Sarkari Master: Jungle, Jajba Aur Jung, Hindi Novel by Aakash Singh Rathore 'Musafir'

Sarkari Master: Jungle, Jajba Aur Jung, Hindi Novel by Aakash Singh Rathore 'Musafir'

by Akash Singh Rathore 'मुसाफ़िर'

सरकारी मास्टर" सिर्फ एक शिक्षक की कहानी नहीं है, बल्कि भारत के उन हजारों गुमनाम गाँवों की दास्तां है जो नक्शे पर तो हैं, लेकिन विकास की नज़रों से ओझल हैं। कहानी का नायक, अगस्त्य, शहर की चकाचौंध में पला-बढ़ा एक महत्वकांक्षी युवा है, जिसके लिए सरकारी नौकरी सिर्फ एक 'सुरक्षा कवच' थी। लेकिन उसकी तकदीर उसे 'महुआ-डीह' ले आती है—एक ऐसा आदिवासी गाँव जहाँ बिजली और नेटवर्क से पहले भूख और अंधविश्वास पहुँचते हैं। यहाँ शिक्षा व्यवस्था कागज़ों पर 'फर्स्ट क्लास' है, लेकिन असलियत में स्कूल की छत छलनी है और मिड-डे मील का राशन प्रधान के गोदाम में कैद है। शुरुआत में अगस्त्य भागना चाहता है। उसे वहां की धूल, गरीबी और सन्नाटा काटता है। लेकिन एक 8 साल के बच्चे, बुधिया, का एक ताना—"पिछला मास्टर छत उखाड़ ले गया, तुम क्या ले जाओगे?"—उसके जमीर को झकझोर देता है। वह रुकने का फैसला करता है। यहाँ से शुरू होती है अगस्त्य की जंग। उसकी टक्कर किसी छोटे-मोटे गुंडे से नहीं, बल्कि प्रधान जोरावर सिंह से है, जो मानता है कि "गरीब पढ़-लिख गया तो सवाल पूछेगा, और अनपढ़ रहेगा तो जी-हुज़ूरी करेगा।" अगस्त्य को 'किडनी चोर' कहकर बदनाम किया जाता है, उसके स्कूल का राशन चोरी होता है, उसकी निजी ज़िंदगी (मंगेतर स्नेहा) छूट जाती है, और अंत में उसके स्कूल पर बुलडोजर (पीला पंजा) चलवा दिया जाता है। लेकिन अगस्त्य हर वार का जवाब लाठी से नहीं, बल्कि 'कलम' और 'दिमाग' से देता है। वह बच्चों को जोड़ता है, गाँव की औरतों को जगाता है और सिस्टम के भीतर छिपे अच्छे लोगों (जैसे सूबेदार रघुबीर और ईमानदार DEO) को साथ लाता है। यह कहानी एक डरपोक नौकरीपेशा लड़के के 'नायक' बनने का सफर है। अंत में, अगस्त्य स्कूल को तो बचा लेता है, लेकिन अपनी सबसे कीमती चीज़—अपना 'शहरी अहंकार'—वहीं छोड़ आता है और बदले में ले जाता है उन बच्चों का बेशकीमती प्यार।

Publisher

SAHITYA SUTRA - SHABDON SE, SAPNON TAK

ISBN

978-9347323447

About the author

Akash Singh Rathore  'मुसाफ़िर'

आकाश सिंह राठौर 'मुसाफ़िर' एक उदीयमान युवा लेखक हैं, जिनका जन्म मल्हार राव होल्कर से संबंध रखने वाले गाँव आलमपुर, जिला भिंड में हुआ। वे और अपनी प्रारंभिक शिक्षा पंडित लज्जा शंकर झा मॉडल स्कूल, जबलपुर से प्राप्त की। वर्तमान में वे स्नातकोत्तर के प्रथम वर्ष में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। लेखक की लेखनी में गहराई और सच्चाई की झलक मिलती है। उनका कहना है, "जो सोचता हूं, वो लिखता हूँ," और उनका मानना है कि शब्दों का सागर भले ही बड़ा न हो, लेकिन कलम के माध्यम से वे अपनी बेबाक बातों को व्यक्त करने की क्षमता रखते हैं। समाज सेवा उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य है और लेखन उनके लिए खुशी का स्रोत है। उनकी प्रमुख किताबें 'सोसायटी कीबिल्ली' 'दो घूंट जिंदगी के,' 'जबलपुर डायरी (प्रेम और प्राकृति का अनुपम सौन्दर्य),' और 'सफ़र अल्फाज़ों का' हैं। इसके अलावा, वे विभिन्न किताबों में सह-लेखक के रूप में भी सम्मिलित रहे हैं। उनकी लेखनी में जीवन की जटिलताओं और समाज की सच्चाइयों को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने की कला विद्यमान है। हिंदी गौरव सम्मान - अंतरराष्ट्रीय बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति उत्तराखण्ड द्वारा (2022-23) *वर्चुअल कवि सम्मेलन- वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज( बुलंदी साहित्यिक सेवा) हिंदी गौरव सम्मान - अंतरराष्ट्रीय बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति उत्तराखण्ड द्वारा (2023-24)