One Sided Love Shyri 🌹
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Agar phir kabhi poocha jaye...
by Virendra Kumar Patel
अगर फिर कभी पूछा जाए… एक ऐसी कहानी है जो वीरेंद्र और चित्रा के बीच शुरू होती है - धीरे, बिना शोर के, जैसे कुछ रिश्ते अपने आप बन जाते हैं। एक कोचिंग क्लास, कुछ साधारण मुलाकातें, और फिर वही बात जो अक्सर समझ में नहीं आती- क्यों कुछ लोग पहली बार में ही अपने लगने लगते हैं। वीरेंद्र शांत है, समझने वाला है। चित्रा अलग है- थोड़ी चुप, थोड़ी मजबूत, और अपने भीतर बहुत कुछ छुपाए हुए। दोनों एक-दूसरे की आदत बन जाते हैं, बिना किसी नाम के, बिना किसी वादे के। लेकिन जैसे-जैसे उनका रिश्ता गहराता है, वैसे-वैसे बाहर की दुनिया भी उनके बीच आकर खड़ी होने लगती है- परिवार, समाज, छोटे शहर की सोच, और वो जिम्मेदारियाँ जो प्यार से बड़ी हो जाती हैं। ये कहानी किसी एक मोड़ की नहीं है, बल्कि उन छोटे-छोटे पलों की है जहाँ रिश्ता बनता भी है और धीरे-धीरे टूटता भी है। जहाँ साथ होने से ज्यादा मुश्किल होता है साथ निभा पाना। जहाँ हर सही चीज़, हर बार सही समय पर नहीं मिलती। ये किताब शादी की कहानी नहीं है, बल्कि उस समझ की कहानी है जो तब आती है जब हम किसी को खोकर भी उसे गलत नहीं ठहरा पाते। और फिर एक दिन… जब सवाल सामने खड़ा होता है - क्या वीरेंद्र और चित्रा सच में साथ हो पाएंगे… या उनका रिश्ता भी उन्हीं कहानियों में शामिल हो जाएगा जो अधूरी रहकर ही पूरी लगती हैं

Noor-E-Ghazal: Shayari Box Set (Zafar, Dagh, Ghalib, Iqbal, Meer, Momin, Zauk) (Hindi)
by Zafar · Daag · Ghalib · Iqbal · Meer · Momin · Zauk
इसमें कोई मतभेद नहीं कि ग़ज़ल उर्दू शायरी की सबसे लोकप्रिय, मनमोहक, दिलकश और मधुर काव्य-विधा है। ग़ज़ल हर दौर में लोगों के दिलों पर राज करती रही है। क़सीदा, मर्सिया, मस्नवी, रुबाई और अन्य शैलियां धीरे-धीरे या तो ख़त्म हो गईं या उनका रिवाज कम से कम होता गया। बल्कि यूं कहें तो ज़्यादा सही होगा कि ग़ज़ल ने उर्दू शायरी के इन तमाम अंदाज़ों को अपने दामन में समो लिया, और अब जो भी कहा जा रहा है उसका अधिकतर भाग ग़ज़ल के रंग में कहा जा रहा है। ग़ज़ल जहां उर्दू शायरी की विरासत है वहीं शायरों की अंतरराष्ट्रीय पहचान भी है। उर्दू अदब के शायरों से हिन्दी जगत अनजान नहीं है। उर्दू ज़बान भारतीय उपमहाद्वीप की मिली-जुली संस्कृति और परंपरा की देन है। “मशहूर शायरों की नुमाइंदा शायरी” श्रंखला के अंतर्गत विश्व-प्रसिद्ध शायर दाग़, ज़ौक़, मोमिन, मीर, ग़ालिब, ज़फ़र और इक़बाल की ग़ज़लों का चयन-संकलन किया गया है। यह चयन प्रक्रिया आसान नहीं थी, क्योंकि हर ग़ज़ल की अपनी ख़ासियत है। ज़बान की नज़ाकत, उसके लबो-लहजे, शिल्पगत भिन्नताओं तथा विषयगत विविधताओं के चलते, किस ग़ज़ल को संग्रह में शामिल किया जाए और किसे छोड़ दिया जाए, यह निर्णय कठिन ही रहा। इन शायरों का अपना एक ख़ास मुकाम है और इनकी ग़ज़लों की भी अपनी ख़ास पहचान है। संपादकीय कौशल से इसे शायरी का एक ऐसा प्रतिनिधि संकलन बनाने की कोशिश की गर्इ है, जो शायरी की समझ रखने वाले हर ख़ासो-आम को पसंद आएगा। इन शायरों की ग़ज़लें अपनी गुणवत्ता के कारण ग़ज़ल-प्रेमियों की ज़बान पर रहती हैं। हमारे गायकों ने उन्हें गाया है और फ़िल्मों में भी इनका उपयोग किया गया है। श्रंखला की प्रत्येक पुस्तक में शायर का जीवन-परिचय दिया गया है और साथ ही ग़ज़लों में आने वाले कठिन शब्दों के अर्थ भी दिये गए हैं। यह संकलन इसी उद्देश्य से तैयार किया गया है कि हिन्दी भाषी भी उर्दू की मिठास, कोमलता और मृदुलता का आनंद ले सकें।

Ghalib (Hindi)
by OP SHARMA
Ghalib

Chand Pe Chai
by Rajesh Tailang
राजेश तैलंग, के बड़े भाई, सुधीर तैलंग, ऊँचे दर्जे के आर्टिस्ट थे और एक नामवर कार्टूनिस्ट! मैं उनका प्रशंसक था। राजेश तैलंग भी शौहरत के हाईवे के राहगीर हैं। ख़ूबसूरत कविताएँ लुटाते आगे बढ़ रहे हैं। ये हाईवे शायद चाँद पर पहुँच कर रुके ! “डीयर राजेश, वहीं चाय पर मिलेंगे।' गुडलक ! -गुलज़ार / राजेश ने कविताओं में जो बातें कही हैं-भोली-भाली, मधुर, सच्ची, लाड़ से मुस्कुराती, बलखाती, मचल-मचल पड़ती, कभी नटखट तो कभी आमन्त्रण भरी या कुल मिलाकर कहें तो एक हक़ीक़त झीनी-झीनी। इनमें संकेत भी हैं और मनुहार भी। बातों को आसानी से कह देना बहुत मुश्किल होता है जो आपके पास पहुँचती हैं, दिल को छू जाती हैं और फिर वहीं ठहर जाती हैं अपनी रसभरी नरम सुगन्ध के साथ। -पीयूष मिश्रा

Doori Ka Ganit (दूरी का गणित) — Hindi Poetry Collection by Sachin Kohli (RJ Mann) — Khyaati Prakashan
by Sachin Kohli
मानव जीवन की सुन्दर बात ये है कि हम सब दूसरे के लिखे में ख़ुद को ढूँढ़ सकते हैं। कवि लिखता अपने लिए है पर उसकी भावनाएँ साझा होती हैं। किसी और के लिखे में हम अपने प्रेयस ढूँढ़ पाते हैं, कोई छोड़ा शहर किसी की कविता में अनायास ही मिल हमें पहचानने की कोशिश करता है। सचिन की रचनाएँ हमारे काल के ऐसे इतिहास को ही साझा करके रखती हैं। इस किताब में हमारे युग के आमजनों के जीवन को सहेजा गया है। ऐसे लोगों के प्रेम को जगह दी गई है जिसे इतिहासकार ज़रूरी नहीं समझेंगे। पर सचिन जैसे युवा कवियों को पता है कि सभ्यता ख़ुद को इन कविताओं के बिना पहचान भी नहीं पाएगी। ये दर्ज होने हर काल में ज़रूरी है कि प्रेम इस काल में भी नैसर्गिक ही रहा। आँसू दुनिया में कभी पहला और आख़िरी नहीं रहा है। किताब हमें अकेला नहीं रहने देती। इसलिए ये किताब और उसके रचयिता सचिन एक ज़रूरी काम कर रहे हैं। वो भविष्य के किसी भावनाओं के पुरातत्वेत्ता के लिए साहित्य की जमीन में हमारे होने के निशान छोड़ रहे हैं। - प्रशांत सागर (किताबगंज)

पहली उड़ान
by Kapil Mishra
पहली उड़ान एक ऐसा काव्य संग्रह है जो जीवन की विभिन्न अनुभूतियों—प्रेम, पीड़ा, बिछड़न, आशा, संघर्ष और आत्मचिंतन—को शब्दों में पिरोता है। इस संग्रह में संकलित कविताएं पाठक को भीतर तक झकझोरती हैं और उन्हें खुद से, अपने बीते पलों और आने वाले कल से जोड़ देती हैं। हर कविता एक अलग भावभूमि पर खड़ी है — कोई विरह की तपन को स्वर देती है, तो कोई प्रेम की नमी को। कहीं समाज की कठोर सच्चाई है, तो कहीं आत्मा की कोमल पुकार। यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो केवल पढ़ना नहीं, अनुभव करना चाहते हैं। जिनके लिए कविता केवल रचना नहीं, एक आत्मीय संवाद है।

Samaj Ke Dayre Me ....(Hindi)
by Bhubneshwar Upadhyay
Phir Wahi Se... is a collection of poems.