
मानव जीवन की सुन्दर बात ये है कि हम सब दूसरे के लिखे में ख़ुद को ढूँढ़ सकते हैं। कवि लिखता अपने लिए है पर उसकी भावनाएँ साझा होती हैं। किसी और के लिखे में हम अपने प्रेयस ढूँढ़ पाते हैं, कोई छोड़ा शहर किसी की कविता में अनायास ही मिल हमें पहचानने की कोशिश करता है। सचिन की रचनाएँ हमारे काल के ऐसे इतिहास को ही साझा करके रखती हैं। इस किताब में हमारे युग के आमजनों के जीवन को सहेजा गया है। ऐसे लोगों के प्रेम को जगह दी गई है जिसे इतिहासकार ज़रूरी नहीं समझेंगे। पर सचिन जैसे युवा कवियों को पता है कि सभ्यता ख़ुद को इन कविताओं के बिना पहचान भी नहीं पाएगी। ये दर्ज होने हर काल में ज़रूरी है कि प्रेम इस काल में भी नैसर्गिक ही रहा। आँसू दुनिया में कभी पहला और आख़िरी नहीं रहा है। किताब हमें अकेला नहीं रहने देती। इसलिए ये किताब और उसके रचयिता सचिन एक ज़रूरी काम कर रहे हैं। वो भविष्य के किसी भावनाओं के पुरातत्वेत्ता के लिए साहित्य की जमीन में हमारे होने के निशान छोड़ रहे हैं। - प्रशांत सागर (किताबगंज)
Publisher
Khyaati Prakashan
ISBN
978-8199333918