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Books semantically related to this poem.

Agar phir kabhi poocha jaye...
by Virendra Kumar Patel
अगर फिर कभी पूछा जाए… एक ऐसी कहानी है जो वीरेंद्र और चित्रा के बीच शुरू होती है - धीरे, बिना शोर के, जैसे कुछ रिश्ते अपने आप बन जाते हैं। एक कोचिंग क्लास, कुछ साधारण मुलाकातें, और फिर वही बात जो अक्सर समझ में नहीं आती- क्यों कुछ लोग पहली बार में ही अपने लगने लगते हैं। वीरेंद्र शांत है, समझने वाला है। चित्रा अलग है- थोड़ी चुप, थोड़ी मजबूत, और अपने भीतर बहुत कुछ छुपाए हुए। दोनों एक-दूसरे की आदत बन जाते हैं, बिना किसी नाम के, बिना किसी वादे के। लेकिन जैसे-जैसे उनका रिश्ता गहराता है, वैसे-वैसे बाहर की दुनिया भी उनके बीच आकर खड़ी होने लगती है- परिवार, समाज, छोटे शहर की सोच, और वो जिम्मेदारियाँ जो प्यार से बड़ी हो जाती हैं। ये कहानी किसी एक मोड़ की नहीं है, बल्कि उन छोटे-छोटे पलों की है जहाँ रिश्ता बनता भी है और धीरे-धीरे टूटता भी है। जहाँ साथ होने से ज्यादा मुश्किल होता है साथ निभा पाना। जहाँ हर सही चीज़, हर बार सही समय पर नहीं मिलती। ये किताब शादी की कहानी नहीं है, बल्कि उस समझ की कहानी है जो तब आती है जब हम किसी को खोकर भी उसे गलत नहीं ठहरा पाते। और फिर एक दिन… जब सवाल सामने खड़ा होता है - क्या वीरेंद्र और चित्रा सच में साथ हो पाएंगे… या उनका रिश्ता भी उन्हीं कहानियों में शामिल हो जाएगा जो अधूरी रहकर ही पूरी लगती हैं

Qitraah । क़ितराह
by Dr. Sushma Gupta
गृहयुद्ध में तबाह सीरिया वहाँ की स्त्रियों के लिए भयावह यातनाघर बन गया। चोटिल देह और आत्मा लिए भारतीय मूल की एक सीरियाई लड़की भारत आती है। यहाँ उसकी मुलाक़ात भारतीय सेना के उस ऑफ़िसर से होती है, जो आतंकवाद से लड़ने में अपना बहुत-कुछ गँवा चुका है। जीवन के सियाह रंगों से भरे ये दो लोग एक लंबी यात्रा पर निकल पड़ते हैं। ‘क़ितराह’ यात्रा में घटित होता गल्प है। वह पहले लड़की और लड़के के जीवन में ‘घट’ चुका है, जो इन दोनों को इस क्रूर ‘घटे’ की गली के अंत तक छोड़ आया है। वहाँ से वापस अकेले लौटने का साहस उनके पास नहीं है। यह उपन्यास पाठकों को भी पात्रों के साथ यात्रा पर ले जाता है जिसे पढ़ते हुए वो अपने भीतर उन अनजाने, भुला दिए गए सपनों की ओर लौटने लगते हैं, लेखक की सुंदर भाषा और दृष्टि का आश्वासन ख़ुद के कंधों पर लिए। पर जब तक जीवन शेष है, घटित-अघटित सब कुछ लौटकर दस्तक देता ही है, बार-बार...
![White Nights । व्हाइट नाइट्स [ विश्व प्रसिद्ध कहानी White Nights का हिंदी अनुवाद ]](https://feelfreetoread-images.b-cdn.net/books/white-nights-white-nights/1.jpg?width=1080&quality=50)
White Nights । व्हाइट नाइट्स [ विश्व प्रसिद्ध कहानी White Nights का हिंदी अनुवाद ]
by Fyodor Dostoyevsky
व्हाइट नाइट्स (White Nights) फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की की कृतियों में एक विशिष्ट और अत्यंत कोमल स्थान रखती है। यह कोई त्रासदी नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर पलने वाले अकेलेपन, स्वप्न और क्षणिक प्रेम की मार्मिक कथा है। यह कहानी उन भावनाओं का दस्तावेज़ है जो अक्सर ज़ोर से नहीं बोलतीं—जो चुपचाप मन के कोनों में पलती रहती हैं। यहाँ प्रेम किसी स्थायी वचन की तरह नहीं आता, बल्कि एक उजली रात की तरह क्षण भर के लिए जीवन को रोशन करता है और स्मृति बनकर रह जाता है। व्हाइट नाइट्स एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो सपनों में जीता है और एक ऐसी मुलाक़ात की, जो जीवन भर के अकेलेपन को एक क्षण के लिए अर्थवान बना देती है। यह अधूरी आकांक्षाओं, न कहे गए प्रेम और स्वप्निल संवेदनाओं का अनुपम साहित्यिक अनुभव है।

BrahmaPatra / ब्रह्मपत्र: न भूतो न भविष्यति / Na Bhuto na Bhavishyati
by Shiv Shankar Jha
क्या हर आवाज़, जो भीतर सुनाई देती है, हमारी ही होती है? और क्या हर स्मृति, सच होती है या मृगतृष्णा? ब्रह्म-पत्र एक ऐसी कथा है जहाँ लिखना धीरे-धीरे आदत नहीं, आवश्यकता बन जाता है। शब्द बार-बार लौटते हैं, प्रश्न गहरे होते जाते हैं, और वास्तविकता अपनी सीमाएँ खोने लगती है। यहाँ प्रेम कोई घटना नहीं बल्कि एक मानसिक अवस्था है, जो समय, दूरी और तर्क से परे फैलती जाती है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, पाठक यह तय नहीं कर पाता कि वह किसी कहानी को पढ़ रहा है या किसी मन के भीतर झाँक रहा है। कुछ रिश्ते स्मृति में बनते हैं, कुछ मौन में टिके रहते हैं और कुछ केवल इसलिए जीवित रहते हैं क्योंकि उन्हें छोड़ा नहीं जा सकता। ब्रह्म-पत्र उन पाठकों के लिए है जो जानते हैं कि सबसे खतरनाक यात्राएँ अपने अंदर की ओर होती हैं। इस कहानी को न पहले कभी लिखा गया है और न ही कभी लिखा जा सकेगा - "न भूतो न भविष्यति"

Noor-E-Ghazal: Shayari Box Set (Zafar, Dagh, Ghalib, Iqbal, Meer, Momin, Zauk) (Hindi)
by Zafar · Daag · Ghalib · Iqbal · Meer · Momin · Zauk
इसमें कोई मतभेद नहीं कि ग़ज़ल उर्दू शायरी की सबसे लोकप्रिय, मनमोहक, दिलकश और मधुर काव्य-विधा है। ग़ज़ल हर दौर में लोगों के दिलों पर राज करती रही है। क़सीदा, मर्सिया, मस्नवी, रुबाई और अन्य शैलियां धीरे-धीरे या तो ख़त्म हो गईं या उनका रिवाज कम से कम होता गया। बल्कि यूं कहें तो ज़्यादा सही होगा कि ग़ज़ल ने उर्दू शायरी के इन तमाम अंदाज़ों को अपने दामन में समो लिया, और अब जो भी कहा जा रहा है उसका अधिकतर भाग ग़ज़ल के रंग में कहा जा रहा है। ग़ज़ल जहां उर्दू शायरी की विरासत है वहीं शायरों की अंतरराष्ट्रीय पहचान भी है। उर्दू अदब के शायरों से हिन्दी जगत अनजान नहीं है। उर्दू ज़बान भारतीय उपमहाद्वीप की मिली-जुली संस्कृति और परंपरा की देन है। “मशहूर शायरों की नुमाइंदा शायरी” श्रंखला के अंतर्गत विश्व-प्रसिद्ध शायर दाग़, ज़ौक़, मोमिन, मीर, ग़ालिब, ज़फ़र और इक़बाल की ग़ज़लों का चयन-संकलन किया गया है। यह चयन प्रक्रिया आसान नहीं थी, क्योंकि हर ग़ज़ल की अपनी ख़ासियत है। ज़बान की नज़ाकत, उसके लबो-लहजे, शिल्पगत भिन्नताओं तथा विषयगत विविधताओं के चलते, किस ग़ज़ल को संग्रह में शामिल किया जाए और किसे छोड़ दिया जाए, यह निर्णय कठिन ही रहा। इन शायरों का अपना एक ख़ास मुकाम है और इनकी ग़ज़लों की भी अपनी ख़ास पहचान है। संपादकीय कौशल से इसे शायरी का एक ऐसा प्रतिनिधि संकलन बनाने की कोशिश की गर्इ है, जो शायरी की समझ रखने वाले हर ख़ासो-आम को पसंद आएगा। इन शायरों की ग़ज़लें अपनी गुणवत्ता के कारण ग़ज़ल-प्रेमियों की ज़बान पर रहती हैं। हमारे गायकों ने उन्हें गाया है और फ़िल्मों में भी इनका उपयोग किया गया है। श्रंखला की प्रत्येक पुस्तक में शायर का जीवन-परिचय दिया गया है और साथ ही ग़ज़लों में आने वाले कठिन शब्दों के अर्थ भी दिये गए हैं। यह संकलन इसी उद्देश्य से तैयार किया गया है कि हिन्दी भाषी भी उर्दू की मिठास, कोमलता और मृदुलता का आनंद ले सकें।

NARAZ
by Rahat Indori
नाराज़ राहत इंदौरी राहत की पहचान के कई हवाले हैं - वो रंगों और रेखाओं के फ़नकार भी हैं, कॉलेज में साहित्य के उस्ताद भी, मक़बूल फ़िल्मी गीतकार भी हैं और हर दिल अज़ीज़ मशहूर शायर भी I इन सबके साथ राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में इंसान की अंदरुनी और बाहरी कश्मकश के प्रत्यक्षदर्शी भी हैं I राहत की शख़्सियत के ये तमाम पहलू उनकी ग़ज़ल के द्वारा सर्वेक्षण और विश्लेषण भी है I राहत की शायरी की भाषा भी उनके विचारों की ही तरह सूफ़ीवाद का प्रतिबिंब है I प्रचारित शब्दावली और अभिव्यक्ति की प्रचलित शैली से अलग अपना रास्ता बनाने के साहस ने ही राहत के सृजन की परिधि बनाई है I निजी अवलोकन और अनुभवों पर विश्वास ही उनके शिल्प की सुंदरता और उनकी शायरी की सच्चाई है I - निदा फ़ाज़ली

MUSAFIR
by Bashir Badr
डॉ. बशीर बद्र के शेरों में जज़्बे और एहसास की जो घुलावट मिलती है वो उन्हें दूसरे शायरों से न सिर्फ़ अलग करती है - बल्कि उनमें ग़ज़ल की आम लफ़ज़ियात से शऊरी गुरेज़ और इर्द गिर्द के माहौल से उनकी ज़ेहनी कुर्बत उन तब्दीलियों का इशारा बनती है जो बाद में ज़्यादा सफ़ाई और चतुराई के साथ उनकी ग़ज़ल की शिनाख़्त मानी जाती है . बशीर बद्र की आवाज़ दूर से पहचानी जाती है .