Arpit Kumar19 June 2026
माँ की मृत्यु के बाद घर
घर वही रहता है,
दीवारें वही, दरवाज़े वही,
लेकिन एक दिन माँ चली जाती है...
और अचानक घर, घर नहीं रहता।
रसोई में बर्तन बजते हैं,
पर भूख नहीं लगती।
आँगन में धूप उतरती है,
पर उजाला नहीं होता।
लोग कहते हैं
समय सब ठीक कर देगा।
पर समय कभी माँ नहीं बनता।
वर्षों बाद भी
जब कोई पूछता है, "घर कब जा रहे हो?"
तो आँखें भर आती हैं,
क्योंकि अब घर तो है...
मगर माँ नहीं।
और जहाँ माँ नहीं होती,
वहाँ लौटकर जाने को
घर नहीं कहते।॥
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