Arpit Kumar5 June 2026
Bagawat
NatureFree Verse#struggle#oppression#resilience+7 more
सुना है आंधियों से बगावत का अब हुनर कर रहे हैं लोग, तभी तो टूटी हुई किश्तियों में भी सफर कर रहे हैं लोग।
कहाँ तो तय था कि हर खेत में लहलहाएगी फसलें, यहाँ तो भूख को भी आँसुओं से अब तर कर रहे हैं लोग।
बड़ी तरकीब से थमाया गया था हमें आज़ादी का झुनझुना, और अब फाइलों में ही हमारे गाँव को खंडर कर रहे हैं लोग।
ये जो हाकिम हैं, मुगालता है इन्हें अपनी ऊँची दीवारों का, इन्हें क्या खबर कि अब तूफानों में बसर कर रहे हैं लोग।
वे बाँट रहे हैं मरहम, मगर अपनी सहूलियत और शर्तों पर, इलाज के वास्ते भी अब यहाँ दर-ब-दर कर रहे हैं लोग।
उन्हें लगता है कि ये जो सन्नाटा है, ये हमारी मुकम्मल हार है, हकीकत ये है कि अपनी चीखों को अब ज़हर कर रहे हैं लोग।
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