Tanu Chouhan20 June 2026
यादपुर 🫶
अब मुझे जबलपुर,
जबलपुर कम, यादों का शहर ज़्यादा लगता है
ऐसा इसलिए कि जो आता है, वो यादें बनाकर जाता है
फिर वो सिविल लाइन की चाय शाय बार, जहाँ हम घंटों बातें करते थे
या फिर गंजीपुरा की गलियाँ, जहाँ कानों में झुमके पहनकर
ये पूछा जाता था, "ये अच्छा लग रहा है या ये"
नर्मदा का पानी, जहाँ हम बस पैर डालकर घंटों बैठे रहते थे
भेड़ाघाट का धुआंधार जिसको मैं इतना घूरकर देखती थी
जैसे धुएं से पानी के उस पार भी कुछ दिखता हो
जबलपुर का नाम, यादपुर होना चाहिए
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