
"“साकेत” हिंदी के श्रेष्ठ कवि मैथिलीशरण गुप्त की अमर काव्यकृति है, जो रामायण की कथा को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है — उर्मिला के माध्यम से। यह काव्य केवल राम-कथा नहीं, बल्कि त्याग, नारी के आत्मबल, और मानवीय संबंधों की गहराई का प्रतीक है। उर्मिला का मौन, उनका प्रतीक्षा-जीवन और पतिव्रता-धर्म की व्याख्या — गुप्त जी की संवेदनशीलता को उजागर करते हैं। “साकेत” में भाषा की मधुरता, भावों की गंभीरता और छंद की अनुशासित लय का अद्भुत संगम है। यह कृति भारतीय नारी के आदर्श और मानवता की मर्यादा का सशक्त स्तंभ है — जो हर युग में प्रासंगिक बनी रहती है। “नारी! तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास-रजत-नव-मंजूषा।”" "“मैथिलीशरण गुप्त की ‘यशोधरा’ एक स्त्री की अदम्य धैर्य, गहन प्रेम और आत्मिक बल की कथा है। यह पुस्तक हमें यशोधरा के जीवन के संघर्ष और त्याग के पलों में ले जाती है, जब वह अपने प्रिय और धर्म के बीच संतुलन बनाए रखती है।” “यशोधरा केवल व्यक्तिगत पीड़ा और प्रेम की कहानी नहीं है; यह स्त्री की गरिमा, साहस और आंतरिक शक्ति का प्रतीक है। प्रत्येक पृष्ठ पर उसके मनोभाव और संवेदनाएँ जीवंत हो उठती हैं, जो पाठक को उसकी दुनिया में समाहित कर देती हैं।” “यह काव्यात्मक यात्रा हमें याद दिलाती है कि सच्ची शक्ति केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक दृढ़ता में निहित होती है। यशोधरा का चरित्र प्रेम, त्याग और स्त्रीत्व की उत्कृष्ट छवि प्रस्तुत करता है, जिसे पढ़ते हुए हर पाठक प्रभावित और प्रेरित होता है।”"
Publisher
Kitabeormai Publications
ISBN
978-9395437257