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मानस की कविताओं का बड़ा हिस्सा मृत्यु के अनुभव से उपजा है; अपने आसपास घटती मौतों के बीच लिखी गई कविताएँ। शेष को प्रेम ने घेर लिया है। उनकी कविता प्रेम और मृत्यु के बीच तनी उस रस्सी पर चलती दिखाई देती है, जहाँ करुणा, भय, आत्मसंघर्ष और जीवन से गहरा आग्रह एक साथ मौजूद हैं। वे कविता को आत्म-अभिव्यक्ति भर नहीं, बल्कि समय के पक्ष में खड़े होने की ज़िम्मेदारी मानते हैं।
Publisher
Hind Yugm
ISBN
978-8119555963