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दर्द से डगर तक: टूटन से आत्मबोध तक की डायरी लेखक दिवाकर की एक बेहद भावनात्मक, सच्ची और आत्मा को छू लेने वाली कृति है, जो दर्द, टूटन, अकेलेपन और आत्म-खोज की गहरी यात्रा को शब्दों में पिरोती है। यह पुस्तक केवल एक प्रेम कहानी का अंत नहीं, बल्कि एक इंसान के भीतर होने वाले संघर्ष, सवालों, यादों और अंततः स्वयं को फिर से पाने की शुरुआत को दर्शाती है। हर अध्याय और हर डायरी-पन्ना पाठक को यह एहसास कराता है कि दर्द केवल खत्म नहीं करता, बल्कि हमें नया रास्ता भी दिखाता है। यह कृति उन सभी लोगों के लिए एक साथी की तरह है, जिन्होंने कभी किसी अपने को खोया है, टूटे हैं, और फिर खुद को संभालने की कोशिश की है। यह पुस्तक बताती है कि टूटन अंत नहीं, बल्कि एक नई डगर की शुरुआत होती है।
Publisher
Booksclinic publishing
ISBN
978-9372549904